Home Entertainment Celebration {15 August} Independence Day Poems -[Desh Bhakti Kavita]

{15 August} Independence Day Poems -[Desh Bhakti Kavita]

Independence Day Poems Desh Bhakti Kavita: When India got freedom in 15th Aug 1947, the Pandit Jawaharlal Nehru was selected the 1st Prime Minister of India. Here I want to share some important points about the Nehru Ji. You all need to know about Nehru Ji and celebrate this day in a new way.

Independence Day Poems

  • Nehru Ji was born on 14th November 1889 in Allahabad.
  • Nehru Ji father name was Moti Lal Nehru and he was the prominent lawyer.
  • Nehru ji completes his higher education from England and returned in India 1912.
  • Nehru ji wants to become a lawyer and he starts the job as a lawyer.
  • Later he involved in Indian Freedom and he joined Gandhi Ji.
  • During the freedom fight, British Empire sent him many times in jail for involving in the free activity.
  • After so much sacrifice and hard work, India got freedom in 1947.
  • After this Nehru Ji was elected the first Prime Minister of India.

15 August Independence Day Poems – Desh Bhakti Kavita

independence-day-15-august-hindi-poem

Patriotism Poems in Hindi Short Desh Bhakti Kavita in Hindi Desh Bhakti Kavita

  • तब विद्रोह जरुरी है Desh Bhakti Poems in Hindi
जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है…
जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है……
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है….
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है………..
जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है…..
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है…………
जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है……
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है……………..
– अभिषेक मिश्र

Independence Day Poems (Desh Bhakti Kavita)

independence-day-15-august-hindi-poemindependence-day-15-august-hindi-poemindependence-day-15-august-hindi-poem
  • मैं भारत माता हूँ
इतने व्यस्त हो गए तुम, कि तुम्हारा देशप्रेम साल में 2 बार जगता है
उन सैनिकों के बारे में सोचो, जिनके जीवन का पल-पल देश के लिए लगता है
कोई देश के लिए शान से मरता है………….
और एक तुम हो, जिसे देश के लिए जीना भी मुश्किल लगता है ?
On field Players और On Screen Heroes आदर्श बन गए हैं तुम्हारे
उन लोगों को तुम याद तक नहीं करते, जो Real Life में Heroes हैं
जरा सोचो इन खोखले Role Models ने तुम्हें क्या दिया है अबतक ?
तुम अपने आदर्श बदल लो, इससे पहले कि औंधे मुँह गिरो तुमपार्टी विरोधियों के विरुद्ध डटकर खड़े हो जाते हो तुम
राष्ट्र विरोधियों के विरुद्ध क्यों नहीं आवाज उठाते हो तुम ?
राजनीति, सत्ता सुख पाने का जरिया है जिनके लिए उन्हें क्यों पूजते हो तुम ?
इससे पहले कि देर हो जाए, राष्ट्रनीति को राजनीति का विकल्प बना लो तुम
न एक शिक्षा नीति, न समान नागरिकता नीति
ये तो है अंग्रेजों की बांटों और राज करो नीति
क्यों किसी और से बदलाव किसी उम्मीद करते हो तुम……
जब खुद देश के लिए……. कुछ नहीं करते हो तुम ? ? ?
मैं भारत माता हूँ तुम्हारी…. मैं आज भी रो रही हूँ
क्योंकि तुम आज भी मोह की नींद में सो रहे हो
हो सके तो, अब भी जाग जाओ तुम……..
इससे पहले कि सब कुछ खत्म हो जाए, खुद को पहचान जाओ तुम.
– अभिषेक मिश्र ( Abhi )

Independence Day Poems (Desh Bhakti Kavita)

independence-day-15-august-hindi-poem-11
  • **बहुत बदल गया अपना देश **
तबसे अब में खूब,मचा विकास का जनादेश !
एसी तैसी हुआ ,बहुत बदल गया अपना देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
अंग्रेजी का भाव बढ़ गया ,देश हुआ परदेश !
पगड़ी गमछा लाज लगे,भाए बिलायती भेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
दाल भात पचता नहीं,रोग बर्गर पिज्जा की तैस !
शौखिनी में बड़ी गरीबी,भुगते लाग बाज की रेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
माँ बहन अफसोस हो गयी,बिटिया हुई कलेस!
कलंकओढ़ बहू जल गयी,कलमुही है सन्देश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
गवांर मरे मजदूरी बिन  ,पढे़-लिखे सब शेष !
करता धरता आलस बांचे,बचा न कुछ उद्देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
साधू सन्त व्यापार करे ,चोर उचक्का आदेश !
हुआ निकम्मा अभिेनेता ,जग बांटे सब उपदेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
शाकाहारी खेत खरीहान ,उजाड़ बसे सब ऐस!
मांसाहारी भूख जीभ का, शमशान बना ए द्वेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
चारा सारा राजनीति खा गया,गाये खाए आवेश !
किसान मरे बिन पानी के,न लगा किसीको ठेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
पत्थर खुद पर दे मारे ,कुछ उन्मादी तर्क अन्वेष !
आम बात हुई सहादत ,क्या सरकारी अध्यादेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
बहुत बदल गया अपना देश !
– अरविंद कुमार तिवारी
बामपुर,इलाहाबाद

Every big leader has a story in their life and all great leaders of India give their time and sacrifice their life for free our India from British. Nehru ji was the person who loved children’s very much.

Independence Day Poems (Desh Bhakti Kavita)

So children also called them Chacha Nehru. Every year we celebrate Children’s day on the birthday anniversary of Nehru ji. All kids who want an Independence Day Poems In Hindi, they will get the Poems here on our national holiday.

  • प्यारा हिंदुस्तान है

अमरपुरी से भी बढ़कर के जिसका गौरव-गान है-
तीन लोक से न्यारा अपना प्यारा हिंदुस्तान है।
गंगा, यमुना सरस्वती से सिंचित जो गत-क्लेश है।
सजला, सफला, शस्य-श्यामला जिसकी धरा विशेष है।
ज्ञान-रश्मि जिसने बिखेर कर किया विश्व-कल्याण है-
सतत-सत्य-रत, धर्म-प्राण वह अपना भारत देश है।

यहीं मिला आकार ‘ज्ञेय’ को मिली नई सौग़ात है-
इसके ‘दर्शन’ का प्रकाश ही युग के लिए विहान है।

वेदों के मंत्रों से गुंजित स्वर जिसका निर्भ्रांत है।
प्रज्ञा की गरिमा से दीपित जग-जीवन अक्लांत है।
अंधकार में डूबी संसृति को दी जिसने दृष्टि है-
तपोभूमि वह जहाँ कर्म की सरिता बहती शांत है।
इसकी संस्कृति शुभ्र, न आक्षेपों से धूमिल कभी हुई-
अति उदात्त आदर्शों की निधियों से यह धनवान है।।

योग-भोग के बीच बना संतुलन जहाँ निष्काम है।
जिस धरती की आध्यात्मिकता, का शुचि रूप ललाम है।
निस्पृह स्वर गीता-गायक के गूँज रहें अब भी जहाँ-
कोटि-कोटि उस जन्मभूमि को श्रद्धावनत प्रणाम है।
यहाँ नीति-निर्देशक तत्वों की सत्ता महनीय है-
ऋषि-मुनियों का देश अमर यह भारतवर्ष महान है।

क्षमा, दया, धृति के पोषण का इसी भूमि को श्रेय है।
सात्विकता की मूर्ति मनोरम इसकी गाथा गेय है।
बल-विक्रम का सिंधु कि जिसके चरणों पर है लोटता-
स्वर्गादपि गरीयसी जननी अपराजिता अजेय है।
समता, ममता और एकता का पावन उद्गम यह है
देवोपम जन-जन है इसका हर पत्थर भगवान है।

-डॉ. गणेशदत्त सारस्वत

Every 15th August is an important day for all Indians and not only Indian’s also for all peoples who are from out country in India.

  • १५ अगस्त १९४७

आज जीत की रात
पहरुए! सावधान रहना
खुले देश के द्वार
अचल दीपक समान रहना

प्रथम चरण है नये स्वर्ग का
है मंज़िल का छोर
इस जन-मंथन से उठ आई
पहली रत्न-हिलोर
अभी शेष है पूरी होना
जीवन-मुक्ता-डोर
क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की
विगत साँवली कोर
ले युग की पतवार
बने अंबुधि समान रहना।

विषम शृंखलाएँ टूटी हैं
खुली समस्त दिशाएँ
आज प्रभंजन बनकर चलतीं
युग-बंदिनी हवाएँ
प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं
यह सिमटी सीमाएँ
आज पुराने सिंहासन की
टूट रही प्रतिमाएँ
उठता है तूफान, इंदु! तुम
दीप्तिमान रहना।

ऊंची हुई मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी
छायाओं का डर है
शोषण से है मृत समाज
कमज़ोर हमारा घर है
किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी
यह विश्वास अमर है
जन-गंगा में ज्वार,
लहर तुम प्रवहमान रहना
पहरुए! सावधान रहना।।

गिरिजाकुमार माथुर

All peoples who are from the foreign country, they also celebrate the Indian Independence Day here. Now Download Best and wonderful Independence Day Patriotic Poems from here and use these 15 August Desh Bhakti Kavita For your school programs.

72nd Independence Day Poems (Patriotic) In Hindi For Kids

hindustan-desh-bhakti-shayari-independence-day

Our motto is to provide some extra information about the Independence Day with this given Independence Day Patriotic Poems and Poems For Kids. This will help you all kids and students to know about our freedom fighters and country peoples who give their life to free our country from British Clutch.

  • १५ अगस्त १९४७

चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,
आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन!
नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण,
तरुण अरुण-सा उदित हुआ परिदीप्त कर भुवन!
सभ्य हुआ अब विश्व, सभ्य धरणी का जीवन,
आज खुले भारत के संग भू के जड़ बंधन!
शांत हुआ अब युग-युग का भौतिक संघर्षण
मुक्त चेतना भारत की यह करती घोषण!

आम्र मौर जाओ हे, कदली स्तंभ बनाओ,
पावन गंगा जल भर मंगल-कलश सजाओ!
नव अशोक पल्लव के बंदनवार बँधाओ,
जय भारत गाओ, स्वतंत्र जय भारत गाओ!
उन्नत लगता चंद्रकला-स्मित आज हिमाचल,
चिर समाधि से जाग उठे हों शंभु तपोज्ज्वल!
लहर-लहर पर इंद्रधनुष-ध्वज फहरा चंचल
जय-निनाद करता, उठ सागर, सुख से विह्वल!

धन्य आज का मुक्ति-दिवस, गाओ जन-मंगल,
भारत-लक्ष्मी से शोभित फिर भारत-शतदल!
तुमुल जयध्वनि करो, महात्मा गांधी की जय,
नव भारत के सुज्ञ सारथी वह नि:संशय!
राष्ट्रनायकों का हे पुन: करो अभिवादन,
जीर्ण जाति में भरा जिन्होंने नूतन जीवन!
स्वर्ण शस्य बाँधों भू-वेणी में युवती जन,
बनो वज्र प्राचीर राष्ट्र की, वीर युवकगण!

लोह संगठित बने लोक भारत का जीवन,
हों शिक्षित संपन्न क्षुधातुर नग्न भग्न जन!
मुक्ति नहीं पलती दृग-जल से हो अभिसिंचित,
संयम तप के रक्त-स्वेद से होती पोषित!
मुक्ति माँगती कर्म-वचन-मन-प्राण-समर्पण,
वृद्ध राष्ट्र को, वीर युवकगण, दो निज यौवन!
नव स्वतंत्र भारत हो जगहित ज्योति-जागरण,
नवप्रभात में स्वर्ण-स्नात हो भू का प्रांगण!

नव-जीवन का वैभव जाग्रत हो जनगण में,
आत्मा का ऐश्वर्य अवतरित मानव-मन में!
रक्त-सिक्त धरणी का हो दु:स्वप्न-समापन,
शांति-प्रीति-सुख का भू स्वर्ण उठे सुर मोहन!
भारत का दासत्व दासता थी भू-मन की,
विकसित आज हुई सीमाएँ जन-जीवन की!
धन्य आज का स्वर्ण-दिवस, नव लोक जागरण,
नव संस्कृति आलोक करे जन भारत वितरण!

नव जीवन की ज्वाला से दीपित हों दिशि क्षण,
नव मानवता में मुकुलित धरती का जीवन!

– सुमित्रानंदन पंत

Indian Independence Day is a great day and written in Indian history. Indian government declared this day national holiday in 1947. It is a national holiday but still, offices, government sector, schools, and colleges remain open. All schools staff and children celebrate the national holiday festival in their schools. Children participate in independence day programs and entertain their all chief guest and parents.

  • आग बहुत-सी बाकी है

भारत क्यों तेरी साँसों के, स्वर आहत से लगते हैं,
अभी जियाले परवानों में, आग बहुत-सी बाकी है।
क्यों तेरी आँखों में पानी, आकर ठहरा-ठहरा है,
जब तेरी नदियों की लहरें, डोल-डोल मदमाती हैं।
जो गुज़रा है वह तो कल था, अब तो आज की बातें हैं,
और लड़े जो बेटे तेरे, राज काज की बातें हैं,
चक्रवात पर, भूकंपों पर, कभी किसी का ज़ोर नहीं,
और चली सीमा पर गोली, सभ्य समाज की बातें हैं।

कल फिर तू क्यों, पेट बाँधकर सोया था, मैं सुनता हूँ,
जब तेरे खेतों की बाली, लहर-लहर इतराती है।

अगर बात करनी है उनको, काश्मीर पर करने दो,
अजय अहूजा, अधिकारी, नय्यर, जब्बर को मरने दो,
वो समझौता ए लाहौरी, याद नहीं कर पाएँगे,
भूल कारगिल की गद्दारी, नई मित्रता गढ़ने दो,

ऐसी अटल अवस्था में भी, कल क्यों पल-पल टलता है,
जब मीठी परवेज़ी गोली, गीत सुना बहलाती है।

चलो ये माना थोड़ा गम है, पर किसको न होता है,
जब रातें जगने लगती हैं, तभी सवेरा सोता है,
जो अधिकारों पर बैठे हैं, वह उनका अधिकार ही है,
फसल काटता है कोई, और कोई उसको बोता है।

क्यों तू जीवन जटिल चक्र की, इस उलझन में फँसता है,
जब तेरी गोदी में बिजली कौंध-कौंध मुस्काती है।

– अभिनव शुक्ला

Students sing 15 August Patriotic Poems in their school function and some students sing the Poems in Hindi and some in English. For all students helps we have this Independence Day Desh Bhakti Kavita in Hindi and English language. Which one you like more, you can download and can use in your school programs. British empire and peoples need to take some pointers from us and know about their Losing moment. Now Indian Army will give a very Big War to all the country who will do any thing wrong in our country.

independence-day-15-august-hindi-poem (1)

15 August Desh Bhakti Kavita For Students

We achieved this day after the hundreds of peoples life sacrifice and our great leader’s hard work. Every great leader and people do hard work in achieving this day. Finally, after two long struggle, India got this day on 15th August 1947. So remember and salute all our country peoples and freedom fighter a big event is organized in Red Fort New Delhi. Our all three armed force performed on this function and show their talent. All three Indian Army, Indian Navy and Indian Air Force participates on Indian Independence Day Parade and entertainment country peoples and show their skills.

15 August Independence Day Short Speech

21 Guns salute is given by our Indian Army to all our freedom fighters and also to our national flag. Tiranga is the most loved flag in all over the world and all country peoples give a salute and respect to our National flag. So you all guys also need to prepare for the school programs and participates in School Independence Day Patriotic Poems competition. Hope this 15 August Desh Bhakti Kavita will help you all students for giving your 100% performance in your school’s programs on this 15th August.

15 August Independence Day Poems For Students

It’s time to remember the 72nd Years of Azadi. In last year on 72nd Independence Day, Modi ji launches program names as Azadi 72 and it is also known as 72 Saal Azadi-Zara Yaad Karo Kurbani. In English this means is 72 years of Independence day and do recall the sacrifices of our freedom fighters and country peoples for achieving this day for their nation peoples. So now we are in years and here you can get Independence Day Poems For Students and 15 August Kavita For Kids.

15 August Independence Day Short Speech

These all Poems lines will help you to perform well on your school’s programs. For more wonderful information about the Indian Independence Day, you can check this website and will get wonderful stuff for 72 Independence Day. I Wish you all guys a Very Happy Independence Day. Jai Hind, Jai Bharat. 

You May Also Read

Load More Related Articles
Load More In Celebration

Check Also

Top 10 Katy Perry songs we should all listen to over and over

Top 10 Katy Perry songs: A few hours ago, the American singer Katy Perry cheered many of h…